एक बार मुझे मेरे गाँव का सरपंच बना दिया गया।

गाँव वालो ने सोचा कि छोरा पढ़ा-लिखा है, समझदार है, यदि ये सरपंच बन गया तो गाँव की भलाई के लिए काम करेगा।
मौसम बदला, सर्दियों के आने के महीने भर पहले गाँव वालों ने मुझसे पूछा कि - सरपंच साहब इस बार सर्दी कितनी तेज पड़ेगी?
मैंने गाँव वालों से कहा कि मैं इसके बारे में आपको कल बताऊंगा।
मैं तुरंत ही शहर की ओर निकल गया, वहाँ जाकर मौसम विभाग में पता किया तो मौसम विभाग वाले बोले - " सरपंच साहब इस बार बहुत तेज सर्दी पड़ने वाली है।"
मैंने भी दूसरे दिन गाँव में आकर ऐसा ही बोल दिया।
गाँव वालो को विश्वास था कि अपने सरपंच साहब पढ़े लिखे हैं, शहर से पता करके आये हैं तो सही कह रहे होंगे। गाँव वालों की दृष्टि में मेरा सम्मान और बढ़ गया। 
तेज सर्दियाँ पड़ने की बात सुनकर गाँव वालों ने सर्दी से बचने के लिए लकडियाँ इक्कठी करनी आरम्भ कर दी।
महीने भर पश्चात जब सर्दियों का कोई नामोनिशान नहीं दिखा तो गाँव वालो ने मुझसे पुनः पूछा, मैंने उन्हें पुनः दूसरे दिन के लिए टाला और शहर के मौसम विभाग में पहुँच गया।
मौसम विभाग वाले बोले कि सरपंच साहब आप चिंता मत करो इस बार सर्दियों के सारे रिकॉर्ड टूट जायेंगे।
मैंने ऐसा ही गाँव में आकर बोल दिया। मेरी बात सुनकर गाँव वाले पागलों की तरह लकडियाँ इक्कठी करने लग गए।
इस प्रकार पंद्रह दिन और व्यतीत गए किन्तु सर्दियों का कोई नामोनिशान नहीं दिखा।
गाँव वाले पुनः मेरे पास आये। .मैं पुनः मौसम विभाग जा पहुंचा।
मौसम विभाग वालों ने फिर वही उत्तर दिया कि सरपंच साहब आप देखते जाइये कि सर्दी क्या प्रलय ढाती है ?
मैंने फिर से गाँव में आकर ऐसा ही बोल दिया।

अब तो गाँव वाले सारे काम धंधे छोड़कर केवल लकडियाँ ही इक्कठी करने के काम में लग गए।
इस प्रकार पंद्रह दिन और व्यतीत हो गए।

परन्तु सर्दिया आरम्भ नहीं हुई।
गाँव वाले मुझे कोसने लगे। 

मैंने उनसे एक दिन का समय और माँगा।
में तुरंत मौसम विभाग पहुंचा तो उन्होंने पुनः ये उत्तर दिया कि सरपंच साहब इस बार सर्दियों के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं।
अब मेरा भी धैर्य टूट चुका था। मैंने पूछा - आप इतने विश्वास से कैसे कह सकते हैं?

मौसम विभाग वाले बोले - " सरपंच साहब हम पिछले दो महीने से देख रहे हैं, पड़ोस के गाँव वाले पागलो की तरह लकडियाँ इक्कठी कर रहे हैं, इसका अर्थ सर्दी बहुत तेज पड़ने वाली है।