सरद-गरम
एक ब एक ताऊ, कसुता उत , अपणे बड़े छोरे के शहर में नए बनाये ओड़ घर में गया अर रात ने बहार बरामदे में खाट गाल के सोगा ! कित जक पड़े थी !
अपने छोरे ते रुका मारया - र मन्ने जाड़े में मारोगे के ? छोरे ने उसकी खाट भीतर गाल दी !
कोन्या डटया गया ! फेर रुका मारया - अर ! मन्ने गर्मी में मारोगे के ?
छोरे ने फेर ताऊ की खाट धेल ते आधी बहार अर आधी भीतर घाल दी !
ताऊ के फेर कुचरनी उठी अर मारया रुका -- अर कसाई मन्ने सरद-गरम करके मारोगे के !
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आलू एंड गोभी
सुरजा फ़ौज मैं था, साल भर पाच्छै छुट्टी आया । सांझ-नैं उसकी बहू रामप्यारी बूझण लाग्गी अक आज कुण-सा साग बणाऊँ ?
सुरजा बोल्या - आलू एंड (and) गोभी रांध ले ! अर इतणा कह कै बाहर गाम मैं घूमण लिकड़-ग्या ।
रामप्यारी सोच मैं पड़-ग्यी - के घरां आलू बी सैं , गोभी बी सै । पर यो एंड (and) के होया ?
रामप्यारी अपणी पड़ोसण धोरै बूझण गई । पड़ोसण नैं बी कोणी बेरा था अक यो एंड के हो सै । उसनै सोची अक ना बताई तो रामप्यारी आगै बेजती हो ज्यागी !
पड़ोसण बोल्यी - एंड तो गोबर हो सै ।
बस, फेर के था ! रामप्यारी नै घरां आ-कै गोबर का छ्यौंक ला-कै साग बणा दिया ।
रोटी खाते टेम सुरजा बोल्या - आज तो सब्जी चरचरी बण रही सै !
रामप्यारी बोल्यी - एंड किमैं घणा पड़-ग्या होगा !!!
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भागदौड़
जंगल म्ह राजा का चुनाव होया अर उसमैं बांदर जीत ग्या। बांदर का राजा बणना शेर तै बर्दाश्त कोनी होया। इस छोंह म्ह वो बकरी के बच्चे नै ठा लेग्या।
बकरी बांदर धौरे आई अर रोंदी-रोंदी बोल्ली – राजा साब शेरे मेरे बच्चे नै ठा के लेग्या थाम उसती बचा ल्यो।
बांदर एक पेड़ तै दूसरे पेड़ पै छाल मारण लाग्या।
बकरी बोल्ली – जी थाम तोले से जाओ इतणे म्ह तो वो शेरे मेरे बच्चे नै खा जावैगा।
बांदर बोल्या – न्यूं खावैगा तो खावैएगा मेरी भागदौड़ मैं कमी हो तो बता !!
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कुत्ते की निगाह
एक बार एक ताऊ पैदल आपणे गांव जावै था
रास्ते में उसके जूती पाँ में काटण लाग गी और ताऊ नै जूतियां आपणी लाठी पै टांग ली और चाल पड़ा गाम नै |
गांम में सुंडू ने देख लिया ताऊ, जूती टाँगे आता हुआ और सुंडू नै मजाक करण की सुझी बोल्या - ताऊ, परांठे बहुत दूर टांग राखे सै
ताऊ भी कम ना था, ताऊ बोल्या - भाई खाण-पीण की चीज़ कहीं भी टांग ल्यो
सुसरे कुत्ते की निगाह वहीं चली जा |
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दिल्ली
एक बे ,समरू का इंटरव्यू आग्या आर वो कंडीडेट तें बुझण लाग्ग्या अक रे तेरे पे के बुझी ? वो बोल्या अक नक़्शे में दिल्ली बुझी थी समरू रट्टा मार के ने भीतर बडगया ।इम्प्लायर ---- समरू बताओ गंगा कहाँ हे ?
समरू ---- दिल्ली बुझ ले ने ,गंगा में के डूब के ने मरेगा ?
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काच्ची जूती
एक बार एक ताऊ की जूती तंग थी तै वो लंगडा कई चाले था एक मेरे बर्गा छोरा बोला ताऊ कित तै लाया ये जूती ??????
ताऊ क छो उठ गया वो बोल्या झाडी पै तै तोड़ कई लाया सूं
तै वो छोरा बोल्या के ताऊ तगाजा कर गया अर तू तै जूती काच्ची ए तोड़ लाया
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एक ब एक ताऊ, कसुता उत , अपणे बड़े छोरे के शहर में नए बनाये ओड़ घर में गया अर रात ने बहार बरामदे में खाट गाल के सोगा ! कित जक पड़े थी !
अपने छोरे ते रुका मारया - र मन्ने जाड़े में मारोगे के ? छोरे ने उसकी खाट भीतर गाल दी !
कोन्या डटया गया ! फेर रुका मारया - अर ! मन्ने गर्मी में मारोगे के ?
छोरे ने फेर ताऊ की खाट धेल ते आधी बहार अर आधी भीतर घाल दी !
ताऊ के फेर कुचरनी उठी अर मारया रुका -- अर कसाई मन्ने सरद-गरम करके मारोगे के !
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आलू एंड गोभी
सुरजा फ़ौज मैं था, साल भर पाच्छै छुट्टी आया । सांझ-नैं उसकी बहू रामप्यारी बूझण लाग्गी अक आज कुण-सा साग बणाऊँ ?
सुरजा बोल्या - आलू एंड (and) गोभी रांध ले ! अर इतणा कह कै बाहर गाम मैं घूमण लिकड़-ग्या ।
रामप्यारी सोच मैं पड़-ग्यी - के घरां आलू बी सैं , गोभी बी सै । पर यो एंड (and) के होया ?
रामप्यारी अपणी पड़ोसण धोरै बूझण गई । पड़ोसण नैं बी कोणी बेरा था अक यो एंड के हो सै । उसनै सोची अक ना बताई तो रामप्यारी आगै बेजती हो ज्यागी !
पड़ोसण बोल्यी - एंड तो गोबर हो सै ।
बस, फेर के था ! रामप्यारी नै घरां आ-कै गोबर का छ्यौंक ला-कै साग बणा दिया ।
रोटी खाते टेम सुरजा बोल्या - आज तो सब्जी चरचरी बण रही सै !
रामप्यारी बोल्यी - एंड किमैं घणा पड़-ग्या होगा !!!
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भागदौड़
जंगल म्ह राजा का चुनाव होया अर उसमैं बांदर जीत ग्या। बांदर का राजा बणना शेर तै बर्दाश्त कोनी होया। इस छोंह म्ह वो बकरी के बच्चे नै ठा लेग्या।
बकरी बांदर धौरे आई अर रोंदी-रोंदी बोल्ली – राजा साब शेरे मेरे बच्चे नै ठा के लेग्या थाम उसती बचा ल्यो।
बांदर एक पेड़ तै दूसरे पेड़ पै छाल मारण लाग्या।
बकरी बोल्ली – जी थाम तोले से जाओ इतणे म्ह तो वो शेरे मेरे बच्चे नै खा जावैगा।
बांदर बोल्या – न्यूं खावैगा तो खावैएगा मेरी भागदौड़ मैं कमी हो तो बता !!
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कुत्ते की निगाह
एक बार एक ताऊ पैदल आपणे गांव जावै था
रास्ते में उसके जूती पाँ में काटण लाग गी और ताऊ नै जूतियां आपणी लाठी पै टांग ली और चाल पड़ा गाम नै |
गांम में सुंडू ने देख लिया ताऊ, जूती टाँगे आता हुआ और सुंडू नै मजाक करण की सुझी बोल्या - ताऊ, परांठे बहुत दूर टांग राखे सै
ताऊ भी कम ना था, ताऊ बोल्या - भाई खाण-पीण की चीज़ कहीं भी टांग ल्यो
सुसरे कुत्ते की निगाह वहीं चली जा |
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दिल्ली
एक बे ,समरू का इंटरव्यू आग्या आर वो कंडीडेट तें बुझण लाग्ग्या अक रे तेरे पे के बुझी ? वो बोल्या अक नक़्शे में दिल्ली बुझी थी समरू रट्टा मार के ने भीतर बडगया ।इम्प्लायर ---- समरू बताओ गंगा कहाँ हे ?
समरू ---- दिल्ली बुझ ले ने ,गंगा में के डूब के ने मरेगा ?
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काच्ची जूती
एक बार एक ताऊ की जूती तंग थी तै वो लंगडा कई चाले था एक मेरे बर्गा छोरा बोला ताऊ कित तै लाया ये जूती ??????
ताऊ क छो उठ गया वो बोल्या झाडी पै तै तोड़ कई लाया सूं
तै वो छोरा बोल्या के ताऊ तगाजा कर गया अर तू तै जूती काच्ची ए तोड़ लाया
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पहलवान
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काला आदमी
एक भरपूर काला आदमी जुकाम की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गया। डॉक्टर ने उसे सरसरी निगाह से देखकर कहा कि वो अपने कपड़े उतार दे और दोनों हाथों को जमीन पर टिका दे!
आदमी हैरान परेशान पर उसने यह किया!
ठीक है- डॉक्टर बोला.. अब जानवरों की तरह चलिए, और कमरे के दायें कोने में जाए..
आदमी ने यही किया..
ठीक - डॉक्टर साहब बोले- अब बाएं कोने में जाएं..
बंदा उधर चला गया!अब इस कोने में, अब उस कोने में, अब सामने, अब बीच में..
आदमी घबरा के उठ खड़ा हुआ.. डॉक्टर साहब, कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हो गयी मुझे?
अरे नहीं- डॉक्टर साहब बोले. मामूली जुकाम है, ये दो गोली लो सुबह तक ठीक हो जाओगे..
पर डॉक्टर साहब आपने ये मेरा एक घंटे तक इस तरह परीक्षण क्यों किया..
कुछ नहीं यार- डॉक्टर साहब बोले.. बात यह है कि मैंने एक काले रंग का सोफा खरीदा है, मैं देखना चाहता था इस कमरे में वो किस जगह ठीक दिखेगा!
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काला आदमी
एक भरपूर काला आदमी जुकाम की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गया। डॉक्टर ने उसे सरसरी निगाह से देखकर कहा कि वो अपने कपड़े उतार दे और दोनों हाथों को जमीन पर टिका दे!
आदमी हैरान परेशान पर उसने यह किया!
ठीक है- डॉक्टर बोला.. अब जानवरों की तरह चलिए, और कमरे के दायें कोने में जाए..
आदमी ने यही किया..
ठीक - डॉक्टर साहब बोले- अब बाएं कोने में जाएं..
बंदा उधर चला गया!अब इस कोने में, अब उस कोने में, अब सामने, अब बीच में..
आदमी घबरा के उठ खड़ा हुआ.. डॉक्टर साहब, कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हो गयी मुझे?
अरे नहीं- डॉक्टर साहब बोले. मामूली जुकाम है, ये दो गोली लो सुबह तक ठीक हो जाओगे..
पर डॉक्टर साहब आपने ये मेरा एक घंटे तक इस तरह परीक्षण क्यों किया..
कुछ नहीं यार- डॉक्टर साहब बोले.. बात यह है कि मैंने एक काले रंग का सोफा खरीदा है, मैं देखना चाहता था इस कमरे में वो किस जगह ठीक दिखेगा!
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चौधरण मर ली !
एक बै एक जाट भाई अपनी एक नई रिश्तेदारी में चल्या गया, साथ में उसका नाई भी था । नई रिश्तेदारी थी, खातिरदारी में फटाफट गरमा-गरम हलवा हाजिर किया गया । दोनूं सफर में थक रहे थे, भूख भी करड़ी लाग रही थी ।
हलवा आते ही दोनूंआं नै चम्मच भरी और मुंह में गरमा-गरम हलवा धर लिया । ईब इतना गरम हलवा ना निगल्या जा और ना बाहर थूक्या जा ! बुरा हाल हो-ग्या, आंख्यां में आंसू आ-गे ।
नाई ने हिम्मत करी और बोल्या - "चौधरी, के हुया ?"
जाट बोल्या - "भाई, जब घर तैं चाल्या था, तै थारी चौधरण बीमार सी थी, बस उस की याद आ-गी" ।
नाई की आंख्यां में भी पाणी देख कै जाट बोल्या - "ठाकर, तेरै के हुया ?"
नाई बोल्या - चौधरी, मन्नै तै लाग्गै सै चौधरण मर ली !
हलवा आते ही दोनूंआं नै चम्मच भरी और मुंह में गरमा-गरम हलवा धर लिया । ईब इतना गरम हलवा ना निगल्या जा और ना बाहर थूक्या जा ! बुरा हाल हो-ग्या, आंख्यां में आंसू आ-गे ।
नाई ने हिम्मत करी और बोल्या - "चौधरी, के हुया ?"
जाट बोल्या - "भाई, जब घर तैं चाल्या था, तै थारी चौधरण बीमार सी थी, बस उस की याद आ-गी" ।
नाई की आंख्यां में भी पाणी देख कै जाट बोल्या - "ठाकर, तेरै के हुया ?"
नाई बोल्या - चौधरी, मन्नै तै लाग्गै सै चौधरण मर ली !
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“तीन फेरे भतेरे”
एक बै बनिया की छोरी के ब्याह में फेरे करवावण खातिर कोई बाहमण ना मिल्या । जब कित्तै तैं बाहमण का जुगाड़ ना हुया तै छोरी आळे एक जिम्मेदार जाट नै ले आये । जाट नै फेरे शुरु करवा दिये ।
तीन फेरे होण पाच्छै जाट बोल्या - भाइयो, रस्म तै पूरी हो-गी, छोरी की विदा करवाओ ।
छोरे आळे बाराती बोले - जी, फेरे तै सात होया करैं ।
जाट बोल्या - भाई, बात इसी सै, जै (अगर) उसनै रुकणा होगा तै तीन फेरयां में भी कित्तै ना जावै । अर जै इसनै भाजणा ए सै, तै चाहे पच्चीस फेरे करवा ल्यो !!
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